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बाईपोलर डिस ऑर्डर और इसका इलाज
यह एक प्रकार का गंभीर मानसिक रोग है यह लगभग हर सौ व्यक्तियों में से एक व्यक्ति को होता है इस बीमारी में दो ध्रुव होते हैं जिसमें पहले ग्रुप में तो हमारा मन बहुत उत्साहित रहता है मेनिया में व्यक्ति बहुत ज्यादा चिड़ चढ़ा या फिर उन्माद की स्थिति में हो जाता है दूसरा रोग इसका डिप्रेशन की अवस्था को रिप्रजेंट करता है इसमें व्यक्ति का किसी से बात करने का मन नहीं होता वह एकदम उदास सा बैठा रहता है कुछ काम करने का मन नहीं होता इस प्रकार से पहले स्टेज को हम मेनिया बोलते हैं और दूसरी स्टेज को डिप्रेशन बाईपोलर की कोई भी स्थिति पूरे जीवन काल नहीं रहती है इंसान के साथ यह एक महीने एक हफ्ते या दो महीने दो हफ्ते से मैं ठीक भी हो सकता है ये व्यक्ति को बाय पोलर होता है वो उसके पूरे जीवन काल में यह आठ से नौ बार ये स्टेज आएंगी उसके पूरे जीवन काल में बाईपोलर की बीमारी हमारे इंसानी शरीर में उसके मस्तिष्क के रासानिक संतुलन के बिगड़ने के कारण उत्पन्न होती है बाईपोलर डिसऑर्डर यह एक अनुवांशिक रोगों में भी गिना जाता है अर्थात कि यदि आपके परिवार के बुजुर्गों में से किसी को भी बाईपोलर की बीमारी थी तो उनकी आने वाली पीढ़ी के बच्चों में भी ए बाईपोलर की बीमारी देखने को मिल सकती है यह यह बाईपोलर की कंडीशन अपने क्लोज रिलेशन में जैसे माता पिता या भाई बहन में है तो उससे उसकी सेकंड जेनरेशन में ट्रांसफर होने की संभावना ज्यादा रहती है बाइपोलर डिसॉर्डर के पहला कंडी में पहला केस बच्चे पन्द्रह से पच्चीस साल की उम्र में इंसान को देखने लगता है और इसके बाद बाकी के जीवन काल में आठ से नौ बार यह बाईपोलर डिसऑर्डर रिपीट करता है बाईपोलर के रोगी के दोनों स्टेजों को देखते हुए उनकी लक्षणों के द्वारा पहचान करना बडा ही आसान होता है बाईपोलर में मेनिया और डिप्रेशन दोनों के ही लक्षण अलग अलग होते हैं पहले हम मेनिया की बात करते हैं मेनिया की कंडीशन में उसको उन्माद कहते हैं हिंदी में इसमें हैं व्यक्ति बड़ा ही उत्साहित रहता है बर बोला हो जाता है हैं बहुत ज्यादा बातें करने लगता है खुश खुश रहता है चिडचिडा हो जाता है मेनियाके रोगी के विचार बार बार बदलते रहते हैं उसका एक टॉपिक कम्पलीट नहीं हो पाता फिर तुरंत ही दूसरे टॉपिक पर वह सोचने लगता है उसपे काम करने की बातें करने लगता है और उसको बहुत बड़े प्रोजेक्ट के तौर पर उसको अपने आप को विशेष योग बताएगा सारी समस्याओं का निदान करता अपने आपको बताएगा सारे प्रोजेक्ट का मास्टर माइंड अपने आपको बताएगा चाहे वह शास्त्री संबंधित हो ज्योतिष संबंधी तो खाना हाँ हम पढ़ने लिखने में भी वह अपने आपको श्रेष्ठ बताएगा खेलकूद में भी वह अपने आप को श्रेष्ठ बताएगा और मेनिया रोग से ग्रसित लोगों को दो से तीन घंटे तक कंटिन्यू एक ही टॉपिक पर कई बार बातें करते रहते हैं थकते नहीं हैं और उनके विचार दिमाग से निकलते रहते हैं ऐज स्टेट कंटिन्यू मेनिया रोग से ग्रस्त व्यक्तियों के अंदर पैसे खर्च करने की भी लत पड़ जाती है वो ज्यादा से ज्यादा शॉपिंग पर अपना खर्च करेंगे ब्लास्ट की चीजें खरीद देंगे एक इन्वेस्टमेंट ज्यादा वह अपनी क्षमता से बहुत ज्यादा शॉपिंग कर लेते हैं उनकी बातें भी उनकी क्षमता से उनकी योग्यता से बहुत बड़ी होती हैं उनके जो सोचने की क्षमता होती है वह अन्य लोगों के आम इंसान की सोचने की क्षमता से बहुत ज्यादा धर्म से जुड़ी हुई बड़ी बड़ी बातें करने वाला व्यक्ति मेनिया का मरीज होता है अध्यात्म से जुड़ी बड़ी बड़ी बातें करने वाला व्यक्ति भी मेनिया का मरीज होता है h मेनिया से ग्रसित व्यक्ति अपने आप को प्रकांड पंडित बताने से भी नहीं डरता है ऐसे व्यक्ति जोर जोर से गाने बजाता है और जोर जोर से गाने गाने की भी कोशिश करता है बड़ी बड़ी सूरी ने आवाजें मेनिया से ग्रसित व्यक्ति है और सब परिस्थितियों को देखे बगैर होता है तो म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट को बजाने में भी व्यस्त रहता है अक्सर मेनिया से ग्रसित व्यक्ति ही नींद की कमी रहती है और वह सुबह बहुत जल्दी तीन या चार बजे उठ जाते हैं और उठने के बाद वो कंटिन्यू बोलना शुरू कर देते हैं और मेनिया रोग से ग्रसित व्यक्ति उग्र स्वभाव का भी हो जाता है वह अपने आस पास के लोगों से अक्सर झगड़ता रहता है वह अपने घर के अंदर हो जब घर के बाहर हो वो सामान फेंकना तोड़ना फोड़ना अच्छा था मैं यह कह सकते हैं कि जितने भी गुंडे मवाली होते हैं ये सब मीडिया से ग्रसित लोग ही होते हैं g मेनिया से ग्रसित व्यक्ति को अगर वाहन दे दिए जाते हैं तो वह बहुत तेजी से चलाते हैं वो ट्रैफिक के रूल को तोड़ने वाले व्यक्ति मनिया के ही मरीज होते हैं और उनको उनके इस उग्र स्वभाव के कारण वे अपनी और दूसरे की जान की परवाह भी नहीं करते मेनिया दो भागों पहले एक हैप्पी मेनिया कहलाता है और दूसरा इरिटेटेड मेनिया कहलाता है
बाईपोलर डिसऑर्डर में जो डिप्रेशन के लक्षण आते हैं उसमें मन दुखी ज्यादा रहता है f किसी काम में मन नहीं लगना भी एक डिप्रेशन का ही लक्षण हैं g जिस जो इंसान अपनी हॉबीज को छोड़ा जाता है और वो अपने वो डिप्रेशन का शिकार व्यक्ति ही होता है यह भी एक सबसे बड़ा लक्षण हैं होगी को छोड़ना डे डिप्रेशन का लक्षण है h अपने आप को टॉर्चर करना अपने ऊपर हमला करना अपने जीवन के छेड़खानी करना आत्महत्या की कोशिश करना ये सब डिप्रेशन के लक्षण में शामिल हैं g जीवन के लिए जितने भी नकारात्मक व्यू होते हैं वो सारे अपने मन में सोचते रहना वाला व्यक्ति डिप्रेशन का मरीज कहलाता है h जो व्यक्ति अपने पिछले जन्म के कर्मों के नतीजे पर बात करते हैं वो भी डिप्रेशन के मरीज होते हैं जो व्यक्ति यह कहते हैं कि जो भी वो बर्तमान मे चल रहा वो उनके कल मौका नही है वो भी डिप्रेशन के ही मरीज के r डिप्रेशन के शिकार मरीज होते हैं लोगों से कटे कटे रहते हैं चाहे वो परिवार के लोग हों चाहे वो पड़ोसी हो चाहे वह उनके मेलरोज वाले दोस्त हैं ये सभी और उनके खाने पीने में मन नहीं होता है तथा उनके स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं देता है वह कटीकेरे बाईपोलर डिसऑर्डर को सबसे बड़ा अनुवांशिक कालक रिस्क फैक्टर माना जाता है h किसी व्यक्ति के जीवन काल में आए तनाव को ढंग से डील नहीं कर पाता और असफल हो जाता है इस वजह से भी किसी स्वस्थ इंसान को बाइपोलर डिसऑर्डर की बीमारी हो सकती है h अल्कोहल गांजा और तंबाकू बीड़ी का नशा करने वालों के अंदर बाइपोलर डिसऑर्डर के होने की संभावना ज्यादा बढ़ जाती हैrr जो इंसान बचपन से ही निगेटिव लाइफ स्टाइल को देखता आ रहा है परिवार की और नेगेटिव घटनाओं को ज्यादा देखा हो उसने असफलता को ज्यादा देखा हो वो भी बाईपोलर डिसऑर्डर का शिकार हो जाता है f r बाईपोलर डिसऑर्डर की बीमारी मेल और फीमेल दोनों में बराबर ही होती है जो भी इंसान पिछले एक कंडीशन में से किसी भी कंडीशन उनको फॉलो करता है तो उस उस इंसान के अनशन अनदर बाईपोलर डिसऑर्डर की बीमारी पनप जाती है
बाईपोलर डिसऑर्डर नाम की बीमारी का एक प्रभावी इलाज भी संभव है यह भी इसकी पुष्टि है कि यह अगर किसी इंसान को होता है तो आठ से नौ बार पूरे जीवन काल में होता है लेकिन इसका प्रभावी इलाज किया जाए तो यह पूर्ण रूप से ठीक हो सकती है g बाईपोलर के इलाज से पहले उसकी स्टेज का पता किया जाता है कि ये मेनिया स्टेज का बाईपोलर है या फिर डिप्रेशन स्टेज का है दोनों स्टेजों को अलग अलग परीक्षण होने के बाद फिर दवा फरीदाबाद का उपयोग करना शुरू करते हैं g बाईपोलर के इलाज की नहीं जो दवाएं यूज की जाती हों ने मूड स्टेबिलाइजर के नाम से जाना जाता है ये दवाएं इंसान को नॉर्मल तरीके से नॉर्मल इंसान की तरह काम करने के लिए बनाई गई है g इलाज के दौरान मूड स्टेबलाइजर के द्वारा ही बायपोलर की स्टेज को टर्मिनेट करने के बाद भी दवाएं कंटिन्यू रखी जाती हैं h किसी इंसान के शरीर में बाईपोलर मेनिया या डिप्रेशन जितनी बार होता है उसके मस्तिष्क के न्यूरॉन्स उतनी ही बार डेमेज होते जाते हैं मस्तिष्क के न्यूरॉन्स को बरकरार रखने के लिए ही मूड स्टेबिलाइजर दवाइयों का योज बाईपोलर डिजीज में लिया जाता है g अगर मरीज चिकित्सक की निगरानी में इन दवाओं का उपयोग करता है तो उसके बॉडी पर कोई भी साइड इफेक्ट नहीं होता है और न ही उसको लत लगती है इन दवाओं की g डिप्रेशन के केस में काउंसिलिंग या फिर साइकिलों में साइकिल और थैरेपी का भी यूज किया जाता है डिप्रेशन के मरीज के साथ g ऐसे मरीजों को काउंसिलिंग के दौरान यह बताया जाता है उसकी लाइफ स्टाइल में क्या क्या चेंज करने हैं और उसको नींद के साथ कभी कंप्रोमाइज नहीं करना है यह भी बताया जाता है ऐसे में काउंसलिंग के दौरान h इस बीमारी के मरीज को रात में बराबर नींद लेनी है और दिन में एक्टिव रहना है सनलाइट के हिसाब से अपने कार्य को बरकरार रखने की सलाह दी जाती है g इन दवाओं का उपयोग करने से शरीर का वजन बढ़ता है रोगी के इसलिए उसको सलाह दी जाती है कि वह संतुलित भोजन का उपयोग करें तली हुई चीजों को अवॉइड करें प्रोटीन से युक्त भोजन को भी कम से कम यूज करें g इस काउंसलिंग के दौरान मनुष्य मरीज को बताया जाता है कि मरीज को ये ये लक्षण के कारण ये बीमारी हुई है तो मरीज को अपने लक्षणों के बारे में जानकारी पूरी ही जाती है कि उसको इन लक्षणों के कारण ही


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