10 फ़ीसदी लोगों में मनोविकार नहीं है इतने मनोचिकित्सक
TBLOG
5:02 AM
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10 फ़ीसदी लोगों में मनोविकार
एक अध्ययन के अनुसार
देश में कोरोना वायरस संक्रमण आने से पहले 18 साल की आयु
से अधिक उम्र के 10 फ़ीसदी से ज़्यादा लोग किसी न किसी तरह
के मानसिक विकार से ग्रस्त थे और 2020 तक बढ़ कर
20 प्रतिशत हो जाने का अनुमान था।
लेकिन कोरोना वायरस महामारी और लॉकडाउन के
कारण परिस्थितियाँ बदल गयी हैं। बदले हुये हालात में अब देश में मनोविकार का शिकार
होने वाले व्यक्तियों की संख्या इससे भी अधिक हो सकती है।
इस समय देश के अनेक निजी अस्पतालों में
मानसिक विकार से ग्रस्त व्यक्तियों की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुनने, उन्हें
परामर्श देने और ज़रूरत पड़ने पर दवा देने के लिये मनोचिकित्सक उपलब्ध हैं। कई
ग़ैर सरकारी संगठन भी इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं।
लेकिन, हमारे देश
में इस समय अवसाद या मनोविकारों का उपचार करने के लिये पर्याप्त संख्या में न तो
मनोचिकित्सक ही हैं और न ही अस्पताल। एक अनुमान के अनुसार, इस समय देश में करीब 6 हज़ार मनोचिकित्सक हैं, जो अपर्याप्त हैं।
स्थिति की गंभीरता का अनुमान इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि इस समय राज्य सरकारें 41 मानसिक स्वास्थ्य अस्पतालों का संचालन कर रही हैं।
मौजूदा हालात में भविष्य की कल्पना करके भयभीत होना या अशंकित होना स्वाभाविक है। यही वह क्षण होता है जब व्यक्ति अवसाद, भय, असुरक्षा और अनिश्चितता का शिकार होने लगता है।
यह विडंबना ही है कि हमारे देश में मनोविकार से ग्रस्त व्यक्ति मनोचिकित्सक से सलाह लेने या इलाज कराने के लिये तैयार ही नहीं होते, उनका तर्क होता है कि उन्हें कोई मानसिक बीमारी नहीं है।
लॉकडाउन ख़त्म होने पर लोगों के अवसाद ग्रस्त होने या किसी न किसी प्रकार की असुरक्षा को लेकर आशंकित होने के मामले बड़ी संख्या में सामने आने की संभावना है।
इस महामारी के संकट के दौरान अवसाद या
अज्ञात भय और असुरक्षा की भावना का शिकार हुये व्यक्तियों के मन से असुरक्षा की
भावना निकालने और उनमें आत्मविश्वास पैदा करने के लिये बड़ी संख्या में
मनोचिकित्कों की जरूरत होगी।
इस महामारी की विभीषिका की वजह से बड़ी संख्या में लोगों के मानसिक विकार से ग्रस्त होने की आशंका है। इस स्थिति से निबटने में मनोचिकित्सकों की अहम भूमिका होगी, लेकिन देश में इनकी संख्या बहुत ज़्यादा नहीं है
लेकिन, हमारे देश
में इस समय अवसाद या मनोविकारों का उपचार करने के लिये पर्याप्त संख्या में न तो
मनोचिकित्सक ही हैं और न ही अस्पताल। एक अनुमान के अनुसार, इस समय देश में करीब 6 हज़ार मनोचिकित्सक हैं, जो अपर्याप्त हैं।
स्थिति की गंभीरता का अनुमान इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि इस समय राज्य सरकारें 41 मानसिक स्वास्थ्य अस्पतालों का संचालन कर रही हैं।
मौजूदा हालात में भविष्य की कल्पना करके भयभीत होना या अशंकित होना स्वाभाविक है। यही वह क्षण होता है जब व्यक्ति अवसाद, भय, असुरक्षा और अनिश्चितता का शिकार होने लगता है।


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