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» »Unlabelled » अनुप्´ को लगा कि गांधी जी का रास्‍ता सही है


TBLOG 1:02 PM 0

अनुप्´ महाशय को कॉलेज जाते अब छ: महीने हो चले थे । वे चुपचाप ग्यारह बजे लॉज से निकलते और सड़क की भीड़ में शामिल कॉलेज पहुंच जाते । कॉलेज में एकाध दोस्त बनाए थे, सो क्लास के बाद सीढयों पर बैठ समय काटते । न चाय की आदत थी न सिगरेट की, हां फिल्में खूब देखते थे, पर अकेले ।

एक दिन जब वे रियल् एनलैय्सेस् के क्लास में लेक्चर सुन रहे थे तो एक  लड़के ने उनकी काली कमीज पर सफेद चाक से कुछ लिख दिया। अनुप्´महाशय ने इस हरकत पर बस पीछे मुड़कर देखा और फिर लेक्चर सुनने लगे ।

अगले क्लास में अनुप्´ महाशय उस लड़के के पीछे बैठे थे । क्लास के दौरान उन्होंने भी उसकी पीठ पर कुछ लिख मारा । इस पर लड़के ने आंखे गुरेरी और फुसफुसाया निकलो तो बताते हैं ।

`अनुप्´महाशय ने इसे गंभीरता से नहीं लिया । तत्कालिक तौर पर उन्होंने अपने जूते के आगे के भाग में कुछ कीलें उल्टी खोंस ली कि लड़के ने कुछ किया तो इन्हीं से प्रहार किया जाएगा । पर लेक्चर के दौरान वे भूल गए कि लड़के ने चेतावनी दी थी ।

क्लास के बाद जब लेक्चरार बाहर गए और `अनुप्´ महाशय सीढ़ीनुमा क्लास रूम में नीचे उतरने लगे । अभी आखिरी सीढ़ी पर वे पहुचे थे कि उन्हें अपने चाारों ओर कुछ लहराता दिखा फिर फट-फट की आवाज सुनाई दी । वे 2 खड़ा थे । तब उन्हें अहसास हुआ कि यह आवाज बेल्ट की है और यह उन्हीं पर फटकारी जा रही है ।

अनुप्´महाशय अभी भी कुछ समझ नहीं पा रहे थे तब-तक उन्होंने देखा कि कुछ लड़के उस  लड़के को घूंसों-मुक्कों से पीट रहे हैं । `´अनुप्´महाशय के पास खड़ा लड़का उन्हें उकसा रहा था मारो ससुर को दो हाथ तुम भी । तब उन्हें अपने जूते में खोंसी पिनें याद आईं । तो लड़के `अनुप्´महाशय की पिटाई के एवज में ही उसे पीट रहे थे ।

`अनुप्´ को लगा कि गांधी जी का रास्‍ता सही है।

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