भागवान आए हो
यह उस समय की बात है जब मैं भोपाल में पढ़ता था, जब मैं सागर से लौटकर वापस भोपाल पर जा रहा था…तभी रास्ते में एक पति पत्नी और उनकी गोद मे छोटा बच्चा था उन्होंने मुझे रोका और मुझसे बोले कि हम लोग यहां काम करने आए थे और जो लोग हमारे साथ आए है उनसे हम बिछड़ गए है और मेरी बच्ची बहुत भूखी है उसे दूध पिलाना है, उस समय मोबाइल का इतना प्रयोग नहीं था इसलिए हर किसी के पास मोबाइल नहीं था। तो मेरी जेब में 30 रुपए पड़े थे मैंने उन्हें दे दिए। मेरे पास ऑटो तक के रुपए नहीं बचे थे। मेरा रूम 4,5 km था वहां से तो मैं पैदल ही चलने लगा रात के 9,10 बज रहे होंगे। तभी एक ऑटो वाला आया बोला एम् पि नगर जा रहे हैं, मै पहले चौंका फिर मैं बोला हां जा रहा हूं। ऑटो वाला बोला मेरा घर उसी तरफ है मै वही जा रहा हूँ चलिए आप को छोड़ दूंगा, मै असमंजस में पड़ गया तभी बोला आप चलिए मै चौराहे पर छोड़ दूंगा आपको। फिर मैंने कहा अंकल मेरे पास रुपए नहीं है बोला कोई बात नही मै खाली ऑटो लेकर जाऊंगा इससे अच्छा कोई बैठ जाए। उसने मुझे एम् पि नगर चौराहे पर छोड़ा और तुरंत चला गया मैं उसे धन्यवाद तक नहीं बोल पाया। उसके बाद मैं सोचता रहा कि क्या पता उसके रूप में भागवान आए हो।…इसे अजीब संयोग ही कह सकते हैं।
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